नई दिल्ली, 3 अप्रैल: विदेशी मुद्रा बाजार में मंगलवार को रुपया डॉलर के मुकाबले लगभग अपरिवर्तित होकर 93.06 पर बंद हुआ। इससे पहले पिछले सत्र में यह 93.10 पर बंद हुआ था। रुपया की इस स्थिरता के पीछे मुख्य रूप से बाजार में दुकानों की पोजिशन अनवाइंडिंग और आयातकों द्वारा जोखिम कम करने के लिए हेजिंग गतिविधियाँ रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता और अमेरिकी मुद्रा में मजबूती के चलते रुपया बिकवाली के दबाव में है। हालांकि, आयातक अपनी लागत को नियंत्रित करने के लिए हेजिंग कर रहे हैं, जिससे रुपया में अनियंत्रित गिरावट को रोका जा रहा है। इसके अलावा, विपरीत बाजार में निवेशकों द्वारा कुछ लाभ भी बुक किए गए हैं, जिससे स्थिति में स्थिरता आई है।
मुद्रा बाजार विश्लेषकों की मानें तो यदि विदेशी कैपिटल फ्लो में सुधार होता है या वैश्विक जोखिम माहौल में सकारात्मक बदलाव आता है, तो रुपया मजबूत हो सकता है। वहीं, तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और देश में मौद्रिक नीति की दिशा भी इस पर असर डाल सकती हैं।
वर्तमान में विदेशी निवेशकों की खरीदारी सीमित है, जबकि निर्यातकों की भेजी गई डॉलर की आपूर्ति भी नियंत्रण में बनी हुई है। इसके चलते रुपया डॉलर के मुकाबले सीमित दायरे में कारोबार करता नजर आ रहा है।
फॉरेक्स ट्रेडर्स और वित्तीय संस्थान स्थिति को लेकर सतर्क हैं और आगामी आर्थिक संकेतकों तथा वैश्विक घटनाओं की निगरानी कर रहे हैं। इससे साफ होता है कि रुपया फिलहाल अपनी ट्रेडिंग रेंज में ही रहेगा और बड़ा कोई मोड़ तभी आएगा जब विदेशी आर्थिक या राजनीतिक परिस्थितियों में कोई अहम बदलाव होगा।
सरकार और रिजर्व बैंक भी रुपये की स्थिति को लेकर सजग हैं और बाजार में अस्थिरता को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने को तैयार हैं। इसके तहत विदेशी मुद्रा भंडार प्रबंधन और मौद्रिक नीतियों में बदलाव शामिल हो सकते हैं।
कुल मिलाकर, रुपया फिलहाल 93.00 के आसपास मजबूती और कमजोरी के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, जिससे व्यापारियों और निवेशकों के लिए सतर्कता जरूरी हो गई है। आगामी हफ्तों में वैश्विक वित्तीय परिदृश्य रुपये की दिशा तय करेगा।